Bhabhi Ko Peshab Karte Dekha – Bhabhi ki chudai ki kahani

अब मैंने उसे सीधा लिटा कर अपने लंड को उसके मुँह के अन्दर पेल दिया और उसके मुँह को चोदने लगा और फिर कुछ देर बाद 69 की अवस्था में आ गई। Bhabhi Ko Peshab Karte Dekha

काफ़ी देर चूत चटने के बाद मैंने एक दुम मस्त कर दिया और फिर वो बुरी तरह तड़पने लगी।

अब देर ना करते हुए मैंने उसे घोड़ी बनाया और अपना लंड उसकी चूत पर रख कर एक ज़ोर का झटका मारा…जिसने वो सहन नहीं कर पाई और बहुत ज़ोर से चिल्लाई- उई…मा…। प्लीज़ इसे बहार निकालो…

तो मैंने उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया और कुछ देर तक उसकी चूचियों को मसलने लगा।

वो कुछ देर बाद नॉर्मल हो गई।

मैंने फिर से उसे चोदना चालू किया और एक जोरदार झटका मार कर अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया…जिससे उसकी आंखो से आंसू आ गए।

अब कुछ देर बाद वो एकदम नॉर्मल हो गई और गांड उठा कर मेरा साथ देने लगी। मैंने भी अपने धक्के लगाने की रफ़्तार बहुत ज्यादा तेज़ कर दी।

आब वो फुल एन्जॉय कर रही थी… मैंने उसे लगभाग 30 मिनट तक लगातर चोदा जिस-से वो उतेजित हो कर अकद गई और झड़ गई। उसके बाद उसकी चूत गरम राज से मैं भी झड़ गया।

तोह उस ज़बरदस्त हॉट भाभी के साथ ये मेरा पहला दौर था और उस दिन 2 बार और चुदाई की।

माई वहाँ 3 दिन रुका और इन 3 दिनों में मैंने कम से कम 12 बार चुदाई का मज़ा लिया।

अब मेरे जाने का समय आ गया था, लेकिन दोस्तों, मेरे जाने का मन नहीं कर रहा था।

जाते समय माई उससे बोला- आपको कभी भी मेरी ज़रूरत हो तो बताना… मैं आपके लिए हमेशा तैयार हूं। मेरी शाम की ट्रेन थी… उसने मुझे कुछ पैसे दिए और स्टेशन तक छोड़ने आई और मैं वापस जयपुर चल पड़ी।
और फिर वो थोड़ा चिपककर बैठ गई। अब मुझे उनके इस्तां अपनी पीठ पर महसूस हो रहे थे। मेरा लंड खड़ा हो गया था, मैं भी अपने आप को रोक नहीं पा रहा था।

तभी भाभी मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ने लगी, वो मेरे लंड को सहलाने लगी, मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।

रास्ते में एक खेत आया तो भाभी ने मुझे रोकने को बोला।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो बोली- कुछ नहीं, मैं अभी आई!

और वो झड़ी के पीछे चली गई।

मैंने सोचा आज तो मजा आएगा तो मैं भी बाइक खड़ी करके पीछे चला गया। वाहा जाकर देखा तो वो मूत रही थी।

और मुझे देखकर बोली- शरारती, यहाँ क्यों आए? मैं आने वाली तो थी ना तो यहाँ क्यों आया?

तो माई बोला- एस्से हे! आप क्या कर रही हैं, वो देखने आया था।

वो बोली- देख तो रहा है कि मैं पेशाब कर रही हूं।

जब वो उठी तो मुझे उनकी नंगी चिकनी जांघें और हिप्स के दर्शन हो गए। मेरा लंड खड़ा हो गया, मैंने उन्हें पकड़ लिया और किस करने लगा। वो भी मुझे ज़ोर-ज़ोर से किस कर रही थी, फिर मैंने उनका उरोज़ दबाने लगा और उनका ब्लाउज़ उतार दिया।

तभी भाभी ने मुझे रोक दिया और कहा- अभी नहीं, बाद में घर चल के करेंगे! यहाँ लेटने की जगह नहीं है।

फिर हम घर पहुंचे तो देखा भाभी के सास-ससुर दोनों घर पे थे तो भाभी ने मुझे जाने के लिए कहा।

माई वाहा से चला गया.

एक महीने के बाद मुझे फिर भाभी का फोन आया, बोली- कुछ काम है, मेरे घर आ सकते हैं

मैंने कहा- हा, क्यू नहीं.
माई भाभी के घर पर पहुंच, तो घर पर कोई नहीं था और भाभी रसोई में काम कर रही थी। माई चुपचाप उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उनकी आंखों पर अपने हाथ रख दिए और चुपचाप खड़ा रहा।

वो घबरा गई और मेरे हाथों को डर गया, फिर देखा ये तो मैं हूं।

तो वो मुझसे लिपट गई और बोली— दारा उसने दिया तूने तो!

फिर वो अपने काम में लग गई और मुझे ऊपर के कमरे से चारपाई नीचे लाने के लिए कहा। Bhabhi ki chudai ki kahani

तभी मेरा फोन आया तो मैं बात करते हुए बाहर निकल गया। बात ख़तम होती है, जब मैं वापस आया और भाभी के पीछे जाकर चिपक गया तो भाभी बोली- अभी नहीं!

पर मैं थोड़े से आदमी-ने वाला था, मैंने उनके चूचो को दबा दिया और गाउन के नीचे से पेंटी माई हाथ डाल दिया।

अब वो भी उत्साहित हो गई थी.

फिर हम दोनों उनके कमरे में चले गए, मैंने उनका गाउन उतार दिया और अब वो मेरे सामने ब्रा और पेंटी में थी। फिर मैं उनको ऊपर चढ़ गया और ज़ोर-ज़ोर से चूमने और चूचियों को चूसने लगा।

भाभी ने भी मेरे कपड़े उतार दिए और मेरे लंड को सहलाने लगी। उसके बाद उसने मेरे लंड को सहलाने लगी। उसके बाद उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी। मैं तो जैसी जन्नत में थी। मेरे लंड को चूसने की वजह से मेरा पानी निकल गया।

तभी भाभी बोली- बस? इतने में वह निकल गया? तुम तो बड़े कच्चे खिलाड़ी हो।

मैंने कहा- अभी कहा ख़तम हुआ, अभी खेल तो शुरू हुआ है।

फिर मैंने उनकी पेंटी उतारी और उनकी चूत को चाटने लगा। थोड़ी देर में मेरा लंड दुबारा खड़ा हो गया और मैंने भाभी को अपना ऊपर ले लिया और भाभी की गांड को दबते हुए मैंने भाभी की चूत पर अपने लंड को रखा और झटके देने लगा। मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा था, पर अब तो भाभी भी मज़े से चुदवा रही थी। वो मेरे ऊपर वह घुस-सावरी करने लगी।
फिर मुझसे चिपक कर मुझे चोदने लगी ज़ोर-ज़ोर से झटके लगा कर!

तो भाभी ने बोला- अपना पानी मेरी बुर में चोद दे!

मैंने कहा-कुछ हुआ तो?

वो बोली- पागल, मैंने ऑपरेशन करवाया है।

तो मैंने अपना पानी चोद दिया। फिर हम ऐसे ही नंगे एक दूसरे से लिपटे पड़े रहे।

थोड़ी देर बाद भाभी नीचे से चाय ले आईं और हम दोनों ने एक प्लेट माई चाय के साथ पी ली।

फिर मैंने अपने कपड़े पहन कर आने लगा, तभी भाभी बोली- नालायक, मेरे कपड़े तूने उतारे हैं, तो अब पहनने में शर्म आ रही है क्या?

तो मैंने ‘नहीं’ कहते हुए भाभी की ब्रा उठाई और पहनने लगा, भाभी मुझसे चिपक गई और कहा- मैं जब भी तुझे बुलाऊंगी, तुम आओगे ना?

तो मैंने कहा हाँ और उनकी पेंट को उठाया और पहचान दिया, फिर वहाँ से चला आया।

फिर कुछ दिन बाद मुझे भाभी का फिर फोन आया पर अबकी बार क्या हुआ वो मैं अपनी अगली कहानी बताऊंगा।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी ये कहानी? Sex Story Hindi

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