लखनऊ की नादिरा अब 20 की उम्र की हो रही थी और वो जवानी की तरफ बढ़ रही थी। उसने बी.कॉम की तालीम पूरी कर ली थी। अव्वल दर्जे से तालीम पूरी करने की वजह से उसके मुहल्ले में सभी के Beintahaदिल में उसके लिए एहताराम था। उसके दो भाई और अम्मी, अबू को उस पर नाज़ था। पर नादिरा परेशान थी। कुछ उलझी हुई कुछ सुलझी हुई। जितनी बार वो अकेले में अपने धुधियारे जिस्म को आने में रुकती तो वो परेशान हो जाती। उसकी जवानी अब उबल पर थी गुलाबी लिपस्टिक तो लगाती थी पर उसे मज़ा नहीं आता था। नादिरा ऊपर से नीचे तक धुँध की तरह सफेद थी और काले स्कार्फ में जब अपनी जुल्फों को बांधती तो क़यामत धाती थी। उसके कूल्हे उठे हुए थे ऊपर की ओर उठे हुए, भौंहें जुड़ी हुई और उसकी चूत उभरी हुई थी, निप्पल धसे थे पर गोल खूबसूरत थे, ऊँचाई 5″3 तक होगी। उसके जिस्म की ताकत को देखकर हर उम्र का आदमी नशे में डूब कर उसके ख्यालों में फरिग हो जाता। नादिरा की जवानी के चर्चे हर उम्र के आदमी की जुबान पर थे..
उसको कई हम उम्र के लोगों ने प्रपोज़ल भी दिया लेकिन उसने इनकार कर दिया. जिसकी वजह उसे नहीं पता थी. दिन बीतते गए जिस तरह से पतझड़ में पत्ते गिरते हैं. और कुछ दिनों में उसके मुहल्ले में एक नए मर्द ने किराए पर जगह ली. वो एक फौजी था. जो फौजी गोरों के मुकाबले में कहीं ज़्यादा सेहतमंद और खूबसूरत था. मोहित शर्मा 45 साल की उम्र होने के बावजूद भी वो कहीं ज्यादा मजबूत था, लंबी कद था और गड़बड़ी बढ़ने वाला था.. फौजीगिरी छोड़ दी थी उसने, उसकी पत्नी उसे तलाक दे चुकी थी… क्योंकि उसे पता चला कि उसका फौजी पति शौकिया किस्म का ही। कई मजहब की लड़की उसके साथ जिससे मुलाकात कर चुकी थी.. हर रात कोई न कोई नई लड़की उसकी मजबूत बालों वाली छाती पर चिमटी रहती है। हिंदू औरतें क्या हैं? मुस्लिम और ईसाई लड़कियां उसके जिस्म की चाहती रखती थीं। एक मर्तबा नादिरः अपने छज्जे पर कड़ी हुए फूलवाले को आवाज़ लगा रही थी और इधर फौजी मर्द नीचे से अपना सामान अंदर रख रहा था.. उसके कानों में नादिरः की आवाज़ घुल रही थी.. और दोनों की नज़रों का राब्ता हुआ और दोनों एक दूसरे के ख्यालों में रूबरू हुए फिर सिलसिला शुरू हुआ था.. मोहित पुजारी हिंदू था गुरुवार को वो सूरज को पानी देता था और उस दिन भी हमेशा की तरह से मोहित अपने घर छत पर था, अपनी पीली धोती में अंदर कुछ नहीं ऊपर से नंगा और रुद्राक्ष की मालाओं से उसका बालों वाला सीना ढका हुआ था और सूरज को अर्ग दे रहा था.. और इधर अपनी छत पर नादिराह आसमानी रंग के सलवार कमीज में कपड़ों को फैलाने आ गई दोनों की छतें मिली हुई तो कपड़े उड़कर इधर उधर चले जाना लाजमी था। नादिर की नज़र मोहित के हिंदू जिस्म पर रुकी हुई थी उसकी पीली धोती से उसका लंड दिख रहा था… समझ ले कितना उबर होगा उस फौजी लंड में.. इधर उसने देखा कुछ कपड़े मोहित की छत पर है तो वो उन्हें उठाने के लिए उधर गई और मोहित आँखें बंद करके घूम रहा था.. और दोनों टकरा गए.. नादिर की मुसलमान कोमल कुल्हे मोहित के लंड पर लग रहे थे जिसने उसके अंदर सोए हुए काफिर शेर को जगह दिया था.. नादिर को सकती से मोहित ने पकड़कर लिया था..
और उसकी जिस्म पर उसने हाथ फिरा दिया था। नादिर ने अपने मुसलमानी जिस्म पर उसके सख़्त हाथों को मेहसूस कर सकती थी उसके नरम इस्लामी कुल्हों के ऊपर मोहित का हिंदू काला शेर धोती के अंदर से उफान मार रहा था.. दोनों की जिस्मनी गर्मी एक दूसरे से मिल रही थी मोहित की सांसे नदी अपनी गर्दन पर फील कर रही थी.. और मोहित नाद के इस्लामी बदन को छू रहा था… उसको मरोड़ देना चाहता था… और फिर नादिर शर्मा भाग गई और जा के कमरे में बैठ गई.. नादिर की अम्मी उसको आवाज़ लगाती थी लेकिन फौजी के ख्यालों में प्रगंडा नादिर कुछ सुन नहीं पा रही थी.. इधर मोहित का हिंदू लंड बैठने को तैयार नहीं था उस मुल्ली के जिस्म पर चढ़ना चाहता था। और दोनों एक दूसरे से मिलने के मौके ढूंढने लगे। दोनों एक दूसरे से चैट करने शुरू की और दूसरों की ख्वाहिशों को जानना और मोहित ने ही नादिरा की चाहतों को उछाल दिया उसे मुल्लानी छूटो और काफिर लंड की कहानी सुनाई और ऐसी साइट बताई और उसे अच्छा लगा। नादिर के घर वालों ने मोहित को अपने घर पर बुलाया था और रईस फौजी की खातिरदारी करने में पूरा घर था पर नादिर शर्माने की वजह से उसके सामने नहीं जाना चाहती थी… और मोहित के सामने लजीज खाना तैयार था लेकिन नादिर का खुमार मोहित पर छाया था.. खाना खत्म करके मोहित हाथ धोने गया और देखा नादिर के मुल्लानी कुल्हे उसके सामने ही नादिर हाथ धुल रही थी.. मोहित ने बिना देर की उसके मुल्लानी जिस्म को पकड़कर लिया उसकी गांड को दबाने लगा ज़ोर ज़ोर सी और सलवार के ऊपर से ही उंगली घुसने लगा नदी को लग रहा था सलवार में छेद हो जाएगा पर वो चिल्ला भी नहीं सकती थी क्योंकि डर रही थी उसका मज़ा भी उसे आ रहा था।Muslim sex story
नादिरा: आह्ह छोरिए हमें.. कोई देख लेगा। मोहित: ” देख लेने दे जान तेरी अम्मी भी देख कर खुश हो जाएगी कि उसकी बेटी अब सही हाथों में आ गई है।” मोहित ने नदी का हाथ पकड़कर अपने नीचे के ऊपर से हिंदू फौजी लंड पर रखवा लिया और नदी के लंड के सख़्त अपने मुलानी हाथों से पहचानने लगी थी उसके मोटे मोटे पंजे, उसका बड़ा टोपा, और लंबाई सब.. इधर मोहित तो उसे नंगा कर देना चाहता था लेकिन अपने आपको किसी तरह रोके हुए थे.. पर उसने नादिर की कमीज में हाथ डाल के उसकी मां को मसलना शुरू कर दिया था.. रगड़ा रगड़ी इतनी तेज़ थी कि नादिर की ब्रा टूट गई थी… और मोहित ने वो निकाल के फेक दी… अब नंगे मुसलमान मास को वो दबा रहा था.. उसने नादिरा के गालों को काट कर बोला.. “अपने यार के पास बिना ब्रा के आया कर मेरी मोमिना..
ताकि दूर से ही मेरा लंड खुश हो जाए” नदी हमी भर रही थी बस और काफिर लंड को पकड़कर अपने पास रख लेना चाहती थी.. तब भी उनकी कानों में आहट आई कि कोई आ रहा है ही.. मोहित ने नदी के गोरे कोमल जिस्म से अपनी पकड़कर ढीली कर दी..और नदी अपनी ब्रा वही चोर के भाग गई… नदी की अम्मी नूर बेसिन के पास आई थी.. यह पूछने की मोहित को इतना वक़्त क्यों लग रहा है। मोहित ने बताया कि नल में पानी नहीं था तो वो इंतज़ार करने लगा। अम्मी सुन के चली गई और नदी की टूटी ब्रा मोहित ने अपनी जेब में रख ली। मोहित घर को रवाना हुआ। दोनों के जिस्म की आग बढ़ रही थी नदी अपने मुसलमानी जिस्म की नुमाइश करना चाहती थी..और मोहित उस नुमाइश के मज़े लेना चाहता था। दोनों ने अपनी बात मैसेज में कि मोहित ने अपनी हिंदू मानी नादिर की ब्रा पर निकाल कर उसे भेजी थी और लिखा था “अगली बार यह हिंदू रस तुम्हारे मुसलमानी छेद में होगा”…
नादिर अपनी ब्रा की फोटो देख रही थी.. और मोहित ने उसे छत पर बुलाया.. रात के 2 बजे नादिर छत पर आ गई थी.. गोरे बदन पर कमीज थी पर अंदर से आज मुल्ली नंगी थी.. इधर मोहित सिर्फ नीचे था… स्ट्रीट लाइट भुजाई हुई थी… नादिर को मोहित ने खींचा था और अपनी बाहों में भर कर उसकी कमीज उतार दी थी। मोहित: “मेरी मोमिना कुटिया तेरी ये चुचिया अभी भी धासी क्यों है.. चल अपने हाथ से मेरे लंड को निकाल” वो उसकी छतियों को दबा रहा था नदी: “आआह आह मेरे हिंदू राजा आपने इन्हें चूसा कहाँ ही आज तक,! हह ये आपके इंतज़ार में छुपी हुई थी।” नादिर ने नीचे हाथ डाल दिया था और उसके झांटो वाले लंड में उसके पाकीज़ा उंगली फंस गई थी… मम्मो पर दबाब पड़ने से वो तरह उठी.. ” आआह्ह जानू चूस के खा जाओ मेरे मम्मे आ.. खा लो ना” मोहित यही चाहता था कि नादिर इसी तरह पागल हो जाए.. और मोहित ने उसके धसे हुए निप्पल चूसने शुरू कर दिए.. ” हाँ मेरे नदी रंडी तेरी इस्लामी चूचियां चूस चूस कर उभार दूंगा.. उस पर हिंदू छाप छोड़ दूंगा मेरी रंड” और वो उसकी चाहतों को चूस कर काटने लगा और चूसने लगा जैसे बहुत सालों से दूध का प्यासा हो… और नादिरा भी ऐसे चुसवा रही थी जैसे कोई अपने बच्चे को दूध पिलाता हो और सच में आज उसकी चुचिया दूध से मोहित के मुंह को भर देगी…अन्तर्वासना कहानी