मैं दिल्ली का रहने वाला स्टूडेंट हूँ, अभी ग्रेजुएशन कर रहा हूँ, शाज़िया मेरे स्कूल में पढ़ती थी, दिखने में दूध में शहद मिली जैसे मीठी दिखती थी। Sharmili Shazia Aur Qayamat Ki Raatहोठों पर गुलाब जैसे गुलाबी और उसके दूध (स्तन) काफी बड़े-बड़े और दूध से भरे लगते थे, देखकर लगता था चूज़ों के उसके दूध बाहर निकाल दो। जब भी उसे देखता था एक आग सी लग जाती थी जिस्म में और सोचता, कब इसके साथ जन्नत नशीन होने का मौका मिले।
बात 13 दिसंबर 2015 की है, अक्सर वो शर्मिली जैसी क्लास के एक कोने में बैठे रहकर अपने एक दोस्त अंकिता से बात करते रहती थी। अप्रोच करूं भी तो कैसे? ? अंकिता मुझसे कभी कभी बात करती थी, मैंने उसकी ज़रूरत शाज़िया से बात करना चालू किया, खाली टाइम में उसके बेंच के पास जाकर बैठता और उसका दिल जीतने की कोशिश करता। 2 महीने में बात दोस्त से आगे बढ़कर प्यार तक पहुँच गई। कभी कभी वो मुझे हिंट देती लेकिन कभी कभी लगता कि शी वान’ट इनटू मी। लेकिन मैं भी कट्टर हिंदू था, उसकी सांस तक छोड़ने वाला आदमी।
शाज़िया ने एक दिन मुझे बताया कि उसके घर वाले टिपिकल कंजर्वेटिव मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते हैं। और अगर वो चाहे भी तो किसी गैर मुस्लिम से रिश्ता नहीं रख पाएगी, कम से कम जब तक वो अपने परिवार के साथ है तब तक। , “और अगर परिवार के साथ ना रहे तो ? “ मैंने बोला। तो वो बोली – “अकेले किसके साथ रहूंगी”? मैंने बोला “मेरे साथ”। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और अपने प्यार का इजहार कर दिया। उसने अपनी नज़रें नीचे झुका के मुस्कुराने की तरह, इनडायरेक्टली मेरे प्रपोज़ल पर “हाँ” की मुहर लगा दी। अगले दिन उसका कॉल आया और उसने मुझे अपने घर बुलाया और बोली कि घर पे कोई नहीं है, आज रात कोई नहीं है, अम्मी-अब्बा और उसका छोटा भाई सब आउट ऑफ स्टेशन थे। मैंने बिना कोई वक़्त गवाए उसके घर पहुंचा, उसने दरवाज़ा खोला ही था कि मैंने उसे अपनी बाहों में भर कर उसके होंठों पर अपने होंठों चढ़ा दिए और उसके नरम पाकीज़ा होंठों को चूमने और चूसने लगा, वो भी एक पल के लिए सब कुछ भूल कर मदहोश हो गई। थोड़ी देर वही दरवाज़े के पास उससे छूमता रहा, जिससे वो और भी चार्ज हो गई। डिनर के पहले मैं उसके जिस्म से खेलता, कभी उसके बूब्स पकड़ के दबा देता, कभी चूत को सहलाता, कभी उसकी गांड में अपना मैं घुसा देता। ये सब करते वक़्त वो अपनी आँखें बंद कर लेती, उसकी ये मासूमियत देखकर मेरा उस रात उसका पलंग तोड़ने का प्लान था।
डिनर करने के बाद शाज़िया ने मुझे बताया कि उसकी शादी पहले से तय हो चुकी है, किसी मुहम्मद अयाज़ छुट्टी से। उसने आज तक उसे देखा नहीं लेकिन उसके आमी आबू ने उसकी शादी ज़बरदस्ती तय की थी उस गांडू कटवे अयाज़ से। मैं – “कोई प्रॉब्लम नहीं, शादी कर ले उससे छुट्टी ले, पर आज तेरी कोख में मेरा बच्चा जाएगा, तू मेरे ही बच्चे की माँ बनेगी। और शादी के बाद मैं मर थोड़ी ना जाऊँगा?”
शाज़िया – “हाँ लेकिन मैं नहीं जानती मैं उसके साथ कैसे ज़िंदगी गुज़ारूँगी, मैंने उससे आज तक बात भी नहीं की और देखी तक नहीं।”
मैं- “अगर तुझे वो रंडवा मुल्ला परेशान करे तो मुझे बता दियो, साले के घर में घुसके माँ छोड़ूँगा, उसके बाद उसके सामने से तुझे ले जाकर अपने घर में बिठा दूँगा।”
ऐसा बोलते-बोलते मैं फिर उसके होंठों को चूमने लगा, उसकी गरम सांस और मेरी गरम सांस जैसे मिल गई और हमारे होंठों जैसे एक दूसरे से चिपक गए। उसकी कमर पर रगड़ता तो उसके होंठों और ज़्यादा चूसने लग जाते, किस करते-करते मैंने उसकी सलवार को उठाया और उसकी मोटी घोस्टदार गांड को सहलाना चालू किया। फिर सामने चूत को, और उसकी नाभि में उंगली भी घुसा दिया। जब मैंने देखा कि वो मदहोश हो चुकी है, तब उसको अपनी बहनें उठा लिया और बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने उसको किस करते हुए बोला, मैं इस्लाम की इज्जत करता हूँ इसलिए तुझे तेरे मज़हब के कानूनों के हिसाब से ही छोड़ूंगा। आज रात हम दोनों के लिए कयामत की रात होगी। “शरीयत सेक्स कानून”
मैं – “औरतों को हिजाब पहनने का हुकुम है?, इसलिए तू हिजाब पहन ले बूत बाकी सारे कपड़े उतार दे।
शाज़िया – “ शरीयत सेक्स कानून ? ऐसा तो कोई कानून नहीं है इस्लाम में ।!!
मैं – “ है, जो सिर्फ हिंदुओं को मालूम है , “ उसकी यह मर्दानगी देखकर, मैंने उसके स्तनों को दबा कर फिर उसके होठों को चूम लिया ।
मैं – “ शरीयत सेक्स कानूनों के हिसाब से ही मेरे हिंदू दादा परदादा पाकीजा मुस्लिम औरतों के जिस्म और रूह की आग को ठंडा किया है ।” और आज मैं तेरी करूंगा ।
शाज़िया – “ तो क्या है शरीयत सेक्स कानून ?” मुझे बताओ ना जी,
मैंने अपना नंगा बालों वाला जिस्म उसके चिकने दूधिया गोरे जिस्म पर रख दिया, हम दोनों के जिस्म की गर्मी के बीच में आग बनकर होंठों तक आती और फिर प्यास, हवस, हवस और हमारी रूह तक पहुँच जाती। चुमते वक़्त उसकी दोनों आँखें बुंद थी, जैसे वो मेरे होंठों के पानी को पी रही हो, और उस पानी के मीठेपन का लुत्फ़ ले रही हो। बहुत प्यार आ रहा था उसकी ये मासूमियत देखकर।Muslim sex story
देखते देखते हम दोनों की ज़ुबान भी एक दूसरे का पानी पीने लगी (टंग किस और इंटेंस लिपलॉक)। अब जुनून की सारी हदें पार चुकी थी, और वो पूरी तरह से मेरी काबू में थी।
उसने कहा कि उसकी चूत अब एक्सपैंड – कॉन्ट्रैक्ट हो रही है। उसकी चूत का पानी बहकर उसकी चूत से बाहर आ गया, और पैरों के ज़ैरिए नीचे आने लगा। अपना लंड उसके हाथ में देकर मैंने उसको बोला – “इसे देखो और खेलती रहो,”। शाज़िया ने अपने गोरे हाथों से मेरे मोटे लंड को पकड़ा और उसके होश उड़ से गए। मेरे लंड का साइज़ देखकर बोली – “शायद जन्नत नशीन होने के बाद, राहगीर इसी लंड का पानी पीते होंगे।” मैं- “ना!! ये लंड सिर्फ मुस्लिम खातून और खाला के लिए है, इसका सफेद पानी भी पाक और हलाल है।”
मैं- “शरीयत के हिसाब से, हिंदू का लंड हर मुस्लिम औरत के लिए हलाल होता है और जो मुस्लिम औरत कम से कम 72 हिंदू मर्दों को सैटिस्फाई करेगी उसको जन्नत बख्शता है।”
शाजिया – “अभी तो सिर्फ तुम ही मेरी चूत में लंड घुसा रहे हो और 71 हिंदू लंड कहाँ से खोज के लूं?”
मैं – “हिंदू अपना मोटा लंड और हवस हमेशा मुस्लिम औरतों के रखता है।”
ऐसा बोलकर मैंने उसकी गोरी गीली चूत में अपना लंड घुसा दिया, साथ में उसके क्लिटोरिस को भी तेज़ी से रगड़ रहा था। शाज़िया के गाल निकल पड़ी, मैंने ज़ोर से उसके बूब्स दबाए और निप्पल पर पिंच किया।
मैं – “शरीयत के हिसाब से, रमजान में रोजा और ईद में चुदाई करने वाली हर पाकीजा मुस्लिम औरत पर बेशुमार रहम बरसाती है।”
मेरा जुनून बढ़ गया और मेरा लंड और सक्त लोहा जैसा गरम हो गया, शाजिया की चूत तो बार-बार पानी छोड़ रही थी। ऐसा लग रहा था आज कयामत होगी और अल्लाह तल्लाह खुद आकर शाजिया को दर्शन देंगे। “
हर आती जाति सांस में शाजिया की प्यास दिख रही थी और उसकी आंखें ऑर्गेज्म की वजह से पलट गईं, उसके चेहरे पर पानी आ गया था, यह सब देखकर मैंने अपना लंड ज़ोर से पटक कर उसकी चूत में मार दिया। शाजिया के दोनों पैर पर हवा में कैंप रहे थे, उसका पूरा जिस्म जैसे सेक्स की गर्मी और जुनून से कैंप रहा था। मैंने पूरा लंड अंदर-बाहर करने के बजाए, सिर्फ अपने लंड के सिर को शाजिया के जी-स्पॉट पर रगड़ना चालू किया। चूत के अंदर का जी-स्पॉट पर हथौड़ा करना चालू किया – आखिरकार शाजिया ने चिल्लाते हुए स्क्वर्ट कर दिया। वह एक टन लिक्विड छिड़का”
मैंने अपना लंड शाजिया के हवाले कर दिया, मेरे लंड की चमड़ी पूरी पीछे आ चुकी थी। शाजिया ने मेरे लंड को हिलाते हुए मेरे पाक हिंदू बॉल्स को अपने मुंह में लेकर गुलाब जामुन की तरह छाब दिया। मैंने उस पाप के लिए उसे थप्पड़ मारा। मेरा लंड पूरी तरह से शाजिया के मुंह था, जब वह इसे हिला रही थी, मैं उसके स्तनों को जोर से और बेरहमी से दबा रहा था। उसके निप्पलों को जोर से चुटकी काटते हुए,
मैं- “मेरा वीर्य निकालने वाला है रंडी, एक भी बूंद बाहर नहीं गिरना चाहिए, वरना यह गुनाह तेरा अल्लाह कभी माफ़ नहीं करेगा तुझे,“। मैंने वीर्यपात किया और शाजिया ने पूरा वीर्य एक वफादार मुस्लिम औरत की तरह निगल लिया, 20 सेकंड तक मैं अपना लंड डाले हुए उसके मुंह पर वीर्यपात कर रहा था। मेरा लंड का सिर उसकी गर्दन के बीच में फुस गया था, उसके टॉन्सिल के अंदरूनी हिस्से में मेरा गरम सफेद पानी गिर रहा था। और वह मंत्रमुग्ध और आनंदित थी।
सेक्स के बाद, हम दोनों एक दूसरे के ऊपर बहे दाल के नंगे जिस्म एक दूसरे को चूमते और सहलाते रहे। जैसे जैसे आग और बढ़ जाती है मैंने उसे सुबह करीब 4 बजे फिर से चोदा। इस बार बाथरूम में शावर के नीचे चोदा, फिर बाथटब में। फिर किचन में, मैंने उसके बूब्स पर हनी लगाकर चाटा और चूसा, उसके होठों पर भी। शहद का रस हम दोनों किस के लिए ज़रूर एक दूसरे को पिला रहे थे। मैंने उसे फिर से करीब 7 am किचन में चोदा। कुल मिलाकर, मैंने उस रात उसको 4 बार चोदा और 5 बार उसकी पाकीज़ा चूत में अपना हिंदू कम गिराया। सच में वो रात कयामत की रात थी, शाज़िया और मैंने जन्नत की सैर की। आज शाज़िया लखनऊ में रहती है, हमारे रिश्ते के बारे में और जानना चाहते हो? उस रात के बाद शाज़िया अब शर्मीली नहीं रही, वो अब एक हसीन मुस्लिम है जिसे एक हिंदू ने आज़ाद कर दिया है।Antarvasna Stories Hindi