मेरी तालीम अरबी मदरसे में हुई थी, अब यह पहली बार था कि मैं एक इंग्लिश कॉलेज में तालीम-ए-आफ्ता होने वाली थी, मेरी उम्र 23 साल, रंग गोरा और चूचे मशाल्लाह 36 और गांड-ए-इस्लामी 38 है वैसे कमर बिल्कुल 28 की है इसिलिए पीछे से निकले हुए चुटकुलों को देखकर कोई भी पागल हो जाता था,Namazi Chut Muslim Ki Hindu Lund Se Chudai कुछ दिन गुज़रे थे के कॉलेज की कैंटीन के पीछे देखा के एक लड़का और लड़की होठों में होंट डाले एकदम दूसरे से चिपके हुए थे, लड़की मशाल्लाह से गोरी और खूबसूरत थी और लड़का बेहद काला और लंबा सा था, यह एक अजीब मंज़र था मेरे लिए उफ़ अल्लाह, मैं शर्म ओ हया का ज़िक्र करते हुए वहाँ से चल पड़ी, कुछ देर बाद क्लास शुरू हुई, मैं बा हिजाब ही अपनी क्लास में दाखिल हुई और बैठ गई कुछ ही देर में सारी क्लास भर गई और जिस लड़की को मैंने अभी किस करते हुए देखा था वो बिल्कुल मेरे पास बैठ गई और किताबें निकालने लगी, और मेरी सामने वाली बेंच पर वही लड़का आ बैठा जिसको मैंने मेरी बाज़ू बैठी लड़की के साथ देखा, क्लास टीचर आते ही हज़ारी लगाने लगी कुछ देर बाद मेरा नाम आया मोमिना फातिमा, मैं खड़ी हो गई और कहाँ हाज़िर हूँ, इस पर सब हस पड़े क्योंकि सभी इंग्लिश में बोल रहे हैं थे, मदरसे की तालीम की वजह से मुझे हाजिर हूँ बोलने की आदत होगी, फिर अगला नाम सुनकर हल्का सा झटका लगा, नाजिया फिरदौस और मेरी बाज़ू बैठी लड़की ने जब प्रेज़ेंट कहा उसके बाद का झटका तो मेरी ज़िदगी का अहम मोड़ था, उफ़ अल्लाह अल्लाह, दो नाम बाद जब नाम आया राघव सिंह तो मेरे होश उड़ गए मेरे सामने बैठे काले लंबे लड़के ने जब प्रेज़ेंट कहा जिसको मैंने नाजिया को अपनी गोद में बिठाकर अपने होठों से उसके होंठ चुने हुए देखा, यह कैसे मुमकिन है मेरे दिल ए पाक में ख्याल आया के नाजिया एक मुस्लिमा होकर कैसे उस राघव सिंह की गोद में बैठे अपने होंठ चुसवा रही थी, एक अजीब ख्याल ए मोमिना था मेरा, कुछ दिन गुज़रे, नाज़िया से दोस्ती बढ़ने लगी लेकिन कभी उसने राघव के बारे में नहीं बताया कि वो उससे प्यार करती है फिर एक दिन जब नाज़िया ने कहा कि उसका निकाह होने वाले हैं अब वो कॉल्ग नहीं कर सकती, मैंने हिम्मत करके नाज़िया से पूछा, नाज़ू तू क्या राघव से प्यार करती है ये सुनकर नाज़िया एक लम्हा खामोश रही और फिर मेरे बाज़ू पकड़कर मुझे देखते हुए कहा, हम मुस्लिम लड़कियों की किस्मत में राघव जैसे जवान हिंदू नहीं होते निकाह के लिए मोमिना बस शादी से पहले की बाहर ही हमारी ज़िंदगी है और उदास चेहरा लिए हुए चली गई, मेरे क़ल्ब ए मोमिना में ये बात एक तूफ़ान थी कि क्यों कोई हिंदू से निकाह नहीं हो सकता, मैंने भी थान ली के मैं भी देखती हूँ के आखिर ऐसा क्या घमंड है हिंदू लड़के में के वो प्यार करते और निकाह नहीं बस उस दिन से मैंने पहली बार अपना हिजाब ए मोमिना खोल दिया और सिर्फ बुर्का पहनने लगी, मेरी नज़र ए इमानी अब राघव सिंह पर थी, मैं हर दफ़ा उसको देखा करती थी और वो भी देखकर मुस्कुरा दिया करता। एक दिन की बात है जब क्लास खत्म हुई और सारी बाहर जाने लगी, मैं अपनी किताब रखने में देर हो गई और अकेली जब क्लास से बाहर जाने लगी के अचानक राघव सिंह क्लास में दाखिल हो गया और मेरे दोनों बाज़ू पकड़कर मुझे दीवार से लगा दिया, मेरे हाथ से किताबें गिर गईं, मैं राघव सिंह की आँखों में देखने लगी, एक डर भी था और एक एहसास भी, मेरी आँखों में देखते हुए राघव ने कहा, मोमिना तुम बेहद हसीन और मोहज़िबाना हो तुम्हारी हर अदा मेरे दिल में घर कर गई, तुम्हारा उद्दंड अंदाज़ तुम्हारे गालों पर ये लाली, मोहब्बत होगी तुमसे मोमिना, राघव की प्यार भरी बताउ से अब मेरा सीना फूलने लगा मेरी सांसे लंबी हो गई, मेरी नज़रे कभी उसके चेहरे पर और कभी नीचे हो जाती, मेरा चेहरा ए मुबारक लाल हो गया राघव का घाटी बदन जैसे मुझे अपने खबू में कर चुका था, मेरे चेहरे की मुस्लिम शर्म ओ हया और राघव सिंह का जोशीला प्यार अब उसके होंत मेरे होठों की तरफ बढ़ने लगे, मेरे थार थार करते बदन ए मुस्लिम से अब राघव सिंह का बदन लगने लगा उसका चौड़ा सीना जब मेरे सीना ए इमानी से लगा तो जैसे एक तूफानी लहर दौड़ गई, मेरे होंत कानपने लगे, कानपते होठों से मैंने नाम लिया, राघव मत करो…
लेकिन उसकी साँसे जब मेरी साँसों में थी उसके गरम होंत मेरे मोमिना इस्लामी गरम होंतौ पर लगे अल्लाआह, ऐसा जोश ए मोमिना उठा मेरे अंदर के बस मेरे होंत राघव सिंह के होंतौ को चुनने लगे। लगातार मेरे होठों को चुनने के बाद किसी के आने की आवाज़ आई दोनों ने हाँथ ढीले किए और वो एक हल्का सा धक्का मुझे लगाया जिससे मैं दीवार से टकरा गई और वो नशीली नज़रों से देखते हुए चला गया, मैं दीवार से लग कर कुछ देर बैठ गई फिर अपने हाँथ पोंचे और बाल ठीक थक कर चली गई। मेरी ज़िंदगी का पहला किस वो भी एक हिंदू के होठों से मैं खुश बस खिली खिली लग रही थी।
दूसरे दिन जोहर का वक़्त हुआ, मैं नमाज़ अदा करने के लिए स्टाफ़ वाले रूम में चली गई और वहाँ नमाज़ अदा करने लगी, उस वक़्त वहाँ कोई नहीं था अचानक नमाज़ अदा करते वक़्त महसूस हुआ कि कोई मुझे देख रहा है मैंने इधर उधर देखना मुनासिब नहीं समझा और फिर नमाज़ खत्म करके जैसे ही मैं स्टाफ़ रूम से बाहर निकलने लगी दरवाज़े पर ही मेरा सीना राघव सिंह के सीने से टकरा गया, मैंने चौंक कर कहाँ राघव क्या कर रहे हो यहाँ, मेरी कमर पकड़कर अपने पास खिंचती हुए राघव ने कहा, मुस्लिम लौंडिया की नमाज़ देख रहा था, काफी पोजीशन है तेरी नमाज़ में मोमिना फातिमा, मैंने राघव के सीने पर हल्के से मरते हुए कहा, बेशर्म बातें न करो मैं नमाज़ अदा कर रही थी समझे मिस्टर हिंदू।, राघव ने मेरे सीने पर हाथ रखते हुए मेरे गोल सदोल चूची को पकड़ा और कहा, कभी हमारे साथ भी ऐसी शरारती नमाज़ अदा कर लो, राघव का हाथ लगते ही मेरे सीने में तूफान दौड़ गया मेरी आँखें हल्के से बंद हो गई, मेरे होंत ए इस्लामी कपड़े पहनने लगे हैं अल्लाह ये क्या एक हिंदू मर्द नमाज़ के बाद मेरे जिस्म ए इस्लामी को जकड़े हुए हैं मेरे इमामी सीने में उभरी हुई गोल चूची को अपने सक्त हिंदू हाथ से पकड़ा हुआ है, मेरी गुंबदी चूची को सहलाते हुए मेरी आँखों में देखते हुए राघव ने कहा, हर हर महादेव, बड़ा ही गोल इस्लामी गुंबद है तेरा मोमिना फातिमा, अब मेरे जज़्बात ख़त से बाहर थे मैंने भी अपना हाथ राघव के हाथ पर रख कर कहा तो फिर अपनी इस मज़बूत हिंदू काफ़िर हाथ से दबा कर इस गुंबद-ए-मोमिना पर फ़तेह हासिल कर लो.. चूची दबाते हुए राघव अब मेरे गांड-ए-मोमिना जो माशाअल्लाह से उभरी हुई थी पकड़ कर दबाने लगा.. मैंने राघव की आँखों में देखते हुए कहा, अभी दो रकात नमाज़ बाकी है काफ़िर जी इतना सुनते हाय राघव ने मेरा नरम गोल मुस्लिम छत्र दबाते हुए स्टाफ रूम के अंदर ढकेला और दरवाजा बंद कर दिया और मुसल्ले पर लिखकर खड़ा करते हुए कहा, चल मुस्लिम ए अरबी, इस्लामी इज्जत वाली अब शुरू कर तेरी नमाज़…
मैं हल्के से शरारती हँसी हँसते हुए ओढ़नी बाँधे नमाज़ अदा करने लगी, मैंने अपने दोनों हाथ उठाकर अल्लाहु अकबर कहते हुए सीने पर बाँध लिए और बिस्मिल्ला की..राघव सिंह मेरे सामने आकर शरारत से खड़ा हो गया और अपने हिंदू बदन से कपड़े उतारने लगा, देखते ही देखते राघव सिंह का साँवला सप्तम बदन अब बस अंडरवियर में था उसका हिंदू त्रिशूल का आकार मैं साफ देख सकती थी।राघव सिंह ने एक हाथ मेरे इस्लामी गुंबद चूची जिसपर हाथ था उस पर रखते हुए दूसरे हाथ से अपनी अंडरवियर उतारने लगा जैसे ही लंड ए काफिर बाहर निकला मेरे मोमिना दिल की धड़कन तेज़ होगी ऐसा काफ़िर मोटा काला त्रिशूली लंड मैंने कभी नहीं देखा था, घमंड से ऐसे खड़ा था कि जैसे अब ये मुलौ पर राज करेगा..राघव के झंग पर एक त्रिशूल का टैटू भी था,,,मैंने एक नज़र राघव को देखा और हल्के से मुस्कुरा दिया, मेरे इमामी गुंबद उभार कर जैसे और बड़े होंगे…राघव के सामने रकात बंधे नमाज़ पढ़ते हुए अब मैं झुक कर रुकु में झुक गई और राघव सिंह का त्रिशूल मेरे होठों से टकराया। सुबह रब्बील अज़ीम बोलते हुए मेरे होंत राघव के लंड के सुपारे को सहलाने लगे..राघव ने हंसते मेरी पीठ को थपथपाते हुए कहा…क्या बात है मेरी मुस्लिम रखेल अरबी बोलते हुए होंतौ से मेरे काफ़िर लंड को चौसराही है,,..मुझे भी शरारत सूझी और मैंने अपने दाने से राघव के हिंदू त्रिशूल को पकड़ कर दबाने लगी..राघव ने जोश में मेरे कान पकड़ते हुए कहाँ मोमिना ऐसी इस्लामी रंडी शरारत मत कर यह काफ़िर लंड तो अभी इस्लामी चूत में भी लेना है..मैंने हंसते हुए राघव के हिंदू सुपारे को ज़ोर से चुने हुए सीधी खड़ी होगी,,राघव ने अपनी हिंदू शरारत दिखाना शुरू की थी उसे पता था कि अब मैं सजदे में जाऊंगी बिल्कुल मेरे सर रखने की जगह पर बैठ कर अपना खड़ा काफिर लंड सेट कर दिया और दोनों पैर खोल कर बैठ गया…Muslim Sex story
एक नज़र-ए-मस्ताना राघव की आँखों में डालते हुए अल्लाहु अकबर के साथ सजदे में गई और लंड-ए-काफ़िर सीधा मेरे मुँह में घुस गया..लंड-ए-काफ़िर जैसे ही मेरे इस्लामी होठों को चीरते हुए मुँह में घुसा हुआ..राघव ने हर-हर महादेव का नारा लगाया..मेरी मोमिना मुँह में अब लंड-ए-काफ़िर था…राघव का काफ़िर काला त्रिशली लंड मेरे इस्लामी मुँह में फूल रहा था मैं भी मस्तानी अदा से उसके मोटे हिंदू लंड को चौसराही थी…राघव ने तंज़िया अंदाज़ में कहा,,एक भूखी मुस्लिम कुटिया मेरा हिंदू घमंडी लंड चौसराही है…मैंने सजदे से ही हिंदू आँखों में देखा और फिर सारा काफिर लंड अपने हलक तक ले लिया, फिर छोड़े हुए बाहर निकल कर बैठ गई, फिर दूसरे सजदे में भी राघव के लंड को चुनने लगी राघव ने मेरे सर पर हाथ रख कर कहा,,मोमिना अपने इस्लामी होंट गोल कर..और फिर काफिर साबित लंड को मेरे इस्लामी मु में छोड़ने लगा..मैं सजदे से फिर उसके लंड को ज़ोर से छोड़े हुए निकल कर खड़ी हो गई और दोनों हाथ सीने पर थे..राघव खड़ा होकर मेरे सामने आ गया..मेरे होठों पर अल्फाज़ ए अरबी जारी थे..राघव ने प्यार से मेरी ओढ़नी खोली और मुझे देखते हुए फेंक दी और मेरे सामने बैठ गया मेरी कमीज को उठा कर मेरी इस्लामी सलवार का नाड़ा खोलते हुए मुझे देखा…जय हनुमान जय सिया राम,, हर हर महादेव कहते हुए मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और खिंची कर उतार दी… मेरी गोरे इस्लामी पैर अब नंगे हो चुके थे, सलवार को आहिस्ता से पैर से निकालवा कर फेंकते हुए राघव ने मेरी कमीज उठा कर अपना काफिर मु मेरी पैंटी पर रख दिया और चुनने लगा मेरा सारा इस्लामी बदन बेचैन हो गया मेरे मोमिना पैर कानपने लगे..राघव ने मेरे दोनों पैर पकड़ कर कहा..मोमिना फातिमा तेरी इस्लामी चूत का इज्जत वाला दरवाजा अब इस हिंदू जवान काफिर मर्द के सामने नंगे होने वाला है और कहते हुए मेरी पैंटी को अपने दांतों से खींचे लगा और देखते ही देखते मेरी पैंटी मेरे पैरौ में गिर गई, राघव सिंह मेरे रोबरू खड़ा हो गया…इस्लामी चूत-ए-अरबी नंगी हो गई तेरी मोमिना और शरारत से हँसे हुए मेरे दोनों हाथ सीने पर से चोटें और कमीज को नीचे करके मेरी चुचियों को
बाहर नंगा कर दिया, हर हर गंगे, करेंगे मुस्लिम को नंगे। उफ़ मेरी इस्लामी हूर परी तेरे ये गोल गुंबद तो भगवान कसम उभरे हुए हैं…मैं आधी नंगी और दूध ए इस्लामी मेरी कमीज से बाहर निकले हुए थे..मेरे निप्पल को पकड़ कर राघव ने हल्के से खींचा…मुस्लिम के गुंबद का मीनार तो भूरी है। मैंने भी एक हाथ अपने दूसरे गुंबद पर रखा और एक हाथ से राघव के हिंदू त्रिशूल का सुपारा पकड़ लिया…राघव ने शरारत से कहा। साली इस्लामी गुंबद वाली मुसलमान रंडी, नमाज़ में खड़ी होकर मेरे काफ़िर हिंदू लंड का सुपारा पकड़ती है…अब रुकू के लिए झुकते ही राघव ने मेरी कमीज पकड़ कर उतार दी और मेरी ब्रा का हुक खोल दिया, ब्रा मुसल्ले पर ही गिर गई..जैसे ही मैं रुकू से खड़ी हुई काफ़िर जांबाज़ हिंदू मर्द नीचे लेट गया उसका सर मेरे दोनों पैरों के बीच में था उसका लंड मेरे सजदे वाली जगह पर था..मेरी चूत ए नूरानी को हिंदू पिया देख रहे थे..मैं अल्लाहु अकबर बोलते हुए जैसे जी सजदे में जाते हुए काफ़िर लंड ए मर्दाना को अपनी मोमिना मैं घुसा दिया राघव ने मेरे दोनों चूत पकड़कर मेरी इस्लामी नमाज़ियों की चूत में
अपनी मोहब्बत हिंदू होंट लगा दिए,,मेरे इस्लामी गोल के बड़े गुंबद चुचिया राघव सिंह के पेट पर दबराही थी, राघव मेरी चूत ए इस्लामी को ज़ोर ज़ोर से चुनने लगा। उसके होठों जैसे गरम लोहा हो गए थे और उसका काफ़िर त्रिशूल लंड जैसे एक जलता हुआ रॉड हो, मैं मस्ती से अपने नाज़ुक मोटे होठों उसके काफ़िर सख़्त मोटे लंड पर मर रही कुछ देर बाद मेरी इस्लामी चूत को अच्छे से चुनने के बाद मैं सजदे से उठ कर बैठ गई राघव मेरे सामने बैठ गया और मेरे दोनों इस्लामी गोल गुंबद चूचियों को पकड़कर मेरी आँखों में देखते हुए…हर हर महादेव साली मोमिना फातिमा तेरे ये दो मज़हबी इस्लामी गुंबद तो शान-ए-अरबी है मेरी रखेल, मैं अल्फाज़-ए-अरबी पढ़ते हुए राघव सिंह के लंड को सहलाने लगी फिर राघव ने उठकर अपने काफिर लंड से मेरे होठों पर हल्के से मारते हुए कहा..सजदा कर साली नमाजी रंडी और पीछे आकर अपने घुटनों के बाल बैठ गया, मैं अल्लाहु अकबर का नारा लगाते हुए सजदे में झुक गई पीछे से हाथ डालकर राघव ने मेरा एक इस्लामी गुंबद दबा लिया और दूसरे हाथ से मेरे काले लंबे बालों को पकड़ लिया…इस्लामी चूत ए अरबी साली पढ़ नमाज़ अब…कहते हुए अपना काफ़िर मज़बूत तेज़ त्रिशूल मर्दाना लंड मेरी इस्लामी दरवाज़े पर लगाने लगा..मेरी मज़हबी चूत जैसे राघव के लंड के लिए बेताब बार बार फूल रही थी उसकी मर्दाना कतर अदा जैसे मेरी इस्लामी बदन में आग लग रही थी…मैंने ज़ोर से कहा सुबहाना रब्बील आला और उधर राघव सिंह का काला मज़बूत हिंदू मीनार मेरी इस्लामी चूत में घुस गया….हर हर महादेव…
मेरी मोमिना चूत को चीर कर राघव का हिंदू लंड इस्लामी मज़हबी चूत में घुस गया..हिंदू काफ़िर झटके में ऐसा जोश था के मेरे मु से अल्फाज़ ए अरबी भी बराबर नहीं पढ़े जराहे…मैं कंपटे हुए पधराही और उधर हिंदू धक्के मेरी इस्लामी चूत में लग रहे थे…आह साली मोमिना फातिमा बहुत प्यार करती है ना तू मुझसे मुस्लिम रंडी..अब मेरा सब्र टूट गया और मैं सजदे से चिल्लाई..हाँ हाँ मेरे काफिर ए इस्लामी मेरा दिल आपके लिए धड़कता है मेरी इस्लामी चूत आपके लिए तड़पती है..रंडी नमाजी हूँ आपकी मेरे कतर त्रिशूल वाले हिंदू मर्द,,राघव का दहकता हुआ लंड मेरी इमामी चूत में ज़ोर के धक्के डेरा था अब रहगव ने दोनों हाथों से मेरी दोनों गुंबद गोल चुचिया पकड़ ली और एक कुटिया की तरह मेरी फर्माबरदार इस्लामी खूबसूरत चूत को छोड़ने लगा,,, कैसा लगता है रंडी ए अरबी? राघव का सवाल मेरी जोश ए मोमिना को और बढ़ा दिया..वल्लाहुअल अज़ीम कुव्वत ए हिंदू वा काफ़िर उल अज़ीम…मैंने राघव को देखते हुए कहा और अपनी मोमिना चूत जो कुतिया बनी हुई थी ज़ोर ज़ोर से राघव के हिंदू लंड के प्यार पर मरने लगी..हर बार मेरी चूत ए मज़हबी के होंट खोल कर उसका मोटा काला शेर ए हिंदू लंड घुस कर बाहर आता और मेरे अल्फ़ाज़ ए अरबी..हाय अल्लाह रब्बी,,,,आह मेरी इस्लामी छिनाल तेरी मोमिना चूत की गर्मी मेरे काफ़िर पानी की मोहताज है और दोनों चूत को ज़ोर से पकड़ कर अब जो धक्का दे उसे काफिर ए मर्दाना ने लगाने शुरू किए जैसे कबाब अब हर हर महादेव का भूत सवार हो गया राघव को, राघव का लंड अब फूलने लगा और मैंने भी अपनी इस्लामी चूत के होंट को कस कर राघव के लंड को दबाने लगी,,,,, राघव ने ज़ोर से मेरे गुंबद ए अरबी को दबाते हुए लंबा धक्का देकर देकर एक फव्वारा ए अज़ीम पानी मेरी इस्लामी चूत में छोड़ने लगा,, मैं राघव सिंह की आँखों में देख रही थी, राघव ने मुझे देखकर मुस्कुराए हुए कहा, तेरी इस्लामी नमाज़ज़ी चूत में काफिर पानी है मोमिना फातिमा, मैंने राघव के होंट को चूस कर मैंने कहा,, लंड ए काफिर का ये लावा गर्म पानी अब इस इस्लामी चोट की हिफाजत में रहेंगे और फिर रहगव सिंह ने लंड निकाल कर मेरे चेहरे के सामने कर दिया,, मैंने बिना कुछ कहे उसकी आँखों में देखते हुए अपनी मोमिना ज़बान से उसको साफ किया और एक जज्बात-ए-मोहब्बत वाली मुस्कुराहट दी……..Antarvasna Kahani in Hindi