35 साल की डॉक्टर ज़ीनाथ की शादी के 6 साल बाद इस बात का एहसास हो गया, कि अक्सर बड़े जमींदारों की तरह उसके पति परवेज़ भी उनके खेतों में काम करने वाले मजदूरों की बीवियों से गाँव लेकर जाते हैं, ज़ीनाथ को इस बात के बारे में पता चलने के बाद दुख तो बहुत हुआ, Doctor Zinath Ne Chudwayaलेकिन ज़ीनाथ न तो पति को इन कामों से रोक सकती थी, और न ही उसमें इतनी हिम्मत थी कि वो पति से इस बारे में कोई बात भी करती। खुद एक जमींदार घेरने से तालुक होने की वजह से ज़ीनाथ ये बात खूब जानती थी, कि वो जिसने जमींदार घरों में ये सब कुछ चलता है। इस लिए ज़ीनाथ ने शुरू-शुरू में ना चाहते हुए भी पति के इन नाजायज़ कामों को नज़र अंदाज़ करना शुरू कर दिया। एक दिन वो हॉस्पिटल से जल्दी घर आ गई। ज़ीनाथ जब गाड़ी से उतर कर हवेली में आए तो हवेली में काफी शांति थी। उसने घर में काम करने वाली एक नौकरानी से पूछा के सब लोग किधर हैं तो नौकरानी ने बताया कि उसके सास सुसर उसकी दोनों बच्चों के साथ शहर शॉपिंग के लिए गए हैं। ज़ीनाथ काफी थकी हुई थी इस लिए वो घर के ऊपर वाली मंजिल पर कमरे की तरफ चल पड़ी। जू ही ज़ीनाथ कमरे के पास पहनची तो उस कमरे से अजीब सी आवाज़ सुनाई दी, जिसको सुन कर ज़ीनाथ थोड़ी हेरान हुई। ज़ीनाथ ने कमरे के बंद दरवाजे को आहिस्ता से हाथ लगाया तो पता चला के दरवाजा तो अंदर से बंद है। को कुछ शक हुआ के ज़रूर कोई गाद बाद है, उसने चाबी के छेद से कमरे के अंदर देखने की कोशिश की पर उसे कुछ नज़र नहीं आया। इतनी देर में ज़िनाथ को ख्याल आया के कमरे की दूसरी तरफ एक खिड़की बनी हुई है, जिस पर एक पर्दा तो लगा हुआ है मगर वो कभी कभी हुआ की वजह से थोड़ा हट जाता है,
और अगर वो कोशिश करे तो उस जगह से वो कमरे के अंदर देख सकती है। ज़ीनाथ ने इधर उधर नजर डाली तो उस कोने में एक पुरानी कुर्सी पड़ी हुई नजर आई। ज़ीनाथ फोरन गई और उस कुर्सी को कमरे की खिड़की के नीचे रखा और फिर खुद कुर्सी पर चढ़ गई। ये ज़ीनाथ की कमजोरी थी या फिर बड़किस्मती की खिड़की का पर्दाफाश थोड़ा सा हुआ था, जिस वजह से ज़ीनाथ को कमरे के अंदर झांकने का मोका मिल गया। कमरे में नजर डालते ही अंदर का मंजर देख कर ज़ीनाथ की तो जिससे सांस ही रुक गई… ज़ीनाथ ने देखा के कमरे मैं उसके पति परवेज़ के घर की एक हिंदू नौकरानी रुक्मिणी को घोड़ी बनाकर पीछे से छोड़ रहा था। हलाकी ज़ीनाथ ने पति की इन हरकतों के बारे में मैं बहुत पहले सुन तो बहुत कुछ रखा था, मगर आज तक वो इन बातों को सुन कर दिल ही दिल में कुर्ती रही थी। ये हकीकत है कि किसी बात या काम के बारे में सुनने और उस काम को आँखों के सामने होता हुआ देखने में बहुत फर्क होता है। इसलिए आज आँखों के सामने और ही बिस्तर पर एक नौकरानी को पति से छुड़ाता हुआ देखकर ज़ीनाथ के सब्र का बांध टूट गया और वो गुस्से से पागल हो गई। “परवेज़ ये आप क्या कर रहे हो” ज़ीनाथ ने गुस्से में पुकारते हुए पति को खिड़की से ही देखते हुए कहा। चोरी पकड़े जाने पर परवेज़ और नौकरानी की तो बैठी पीति ही गम हो गई, और उन दोनों के जिस्मों में से तो जैसी जान ही निकल गई, और उन दोनों ने चुदाई फोरन रोक दी। परवेज़ को तो समझ ही नहीं आ रहा था कि वो क्या कहे और क्या करे।
आप दरवाजा खोलो मैं अंदर आ कर आपसे बात करती हूँ।” ज़ीनाथ ये कहती हुई कुर्सी से नीचे उतर कर कमरे की तरफ चल पड़ी। जितनी देर में ज़ीनाथ चक्कर काट कर कमरे के देरवाजे पर पकड़ी, परवेज़ नौकरानी को उसके कपड़े देकर कमरे से रफू चक्कर करवा चुका था। परवेज़ ने ज़ीनाथ के कमरे में आने के बाद उससे किए कि माफ़ी मांगनी चाहिए। मगर ज़ीनाथ आज ये सब कुछ नज़रों के सामने होता देखकर ज़ीनाथ पति को किसी तो माफ़ करने पर तैयार नहीं थी। ज़ीनाथ ने पति को रंगे हाथों नौकरानी को छोड़ते हुए पकड़ा था, तब से ज़ीनाथ दिल ही दिल में एक बगावत जन्म लेने लगी थी। अब नजाने क्यों उसका दिल चाह रहा था, कि जिस तरह उसके पति ने शादी के बाद भी दूसरी औरतों से नाजायज़ तालुकात रखकर ज़ीनाथ के प्यार की तोहिन की है। इसी तरह क्यों ना ज़ीनाथ भी किसी और मर्द से चुदवा कर पति से एक किस्म का बदला ले। ज़ीनाथ के दिल में इस तरह के अजीब अजीब ख्यालात जमने तो लेने लगे थे, लेकिन इतनी बार सोचने के बाद ज़ीनाथ जेसी शरीफ लकड़ी में इस किस्म के ख्यालात को अपने होने की कभी हिम्मत न पड़ी थी। फिर ज़ीनाथ की ज़िंदगी में अनजाने तो पर एक ऐसा वाक्य हुआ जिसने ज़िनाथ की ज़िंदगी में सब कुछ बदल कर रख दिया। ज़िनाथ का ससुराल गाँव ग्वालियार से तकरीर एक घंटे की दूरी पर है। ज़िनाथ के पति और ससुराल वाले गाँव में रहने के बाजु खुले जहाँ के लोग हैं और वो आम लोगों की तरह घर की औरतों पर किसी किस्म की ताकत नहीं रखते। इस लिए ज़िनाथ खुद ही कार चलाकर रोज़ाना गाँव से शहर जॉब पर आती जाती थी। जिस पर उसके पति और ससुराल वालों को किसी किस्म का कोई एतराज़ नहीं था। ज़िनाथ की ड्यूटी ज़्यादा सुबह के समय ही होती, और वो अक्सर शाम को अँधेरा होने से पहले पहले गाँव वापसी चली आती है। यह सिलसिला कुछ देर तो ठीक चल रहा है, मगर फिर कुछ टाइम बाद ज़ीनाथ के हॉस्पिटल के दो डॉक्टर्स का एक ही साथ दूसरे सेहरों में तबादला हो गया। जिसकी वजह से हॉस्पिटल में काम का भोज भाग गया और अब ज़ीनाथ को काम से फ्री होते होते रात को काफी देर होने लगी। चुकी ज़ीनाथ के गाँव का रास्ता रात के वक़्त महफूज़ नहीं था, जिसकी वजह से ज़ीनाथ के पति मकसूद को ज़ीनाथ की रात के वक़्त अकेले घर वापसी आना पसंद नहीं था। इस लिए जब कभी भी ज़ीनाथ लेट होती तो वो पति को फोन करके बता देती।
तो फिर या तो ज़ीनाथ का पति खुद ज़ीनाथ को लेने हॉस्पिटल पहुँच जाता है, या फिर गाँव से ड्राइवर को ज़ीनाथ को लेने के लिए भेज डेटा। इसी डोरन ज़ीनाथ की दोस्त कविता का छोटा भाई 24 साल का विष्णु भी एमबीबीएस की पढ़ाई खत्म कर ली तो उसकी हाउस जॉब भी ग्वालियर में ज़ीनाथ के ही हॉस्पिटल में स्टार्ट हो गई। उसने हॉस्पिटल के पास ही एक छोटा सा फ्लैट रेंट पे ले लिया। उस फ्लैट में एक बेडरूम विद बाथरूम था, जिसके साथ एक छोटा सा किचन या लिविंग रूम था, जोक विष्णु की ज़रूरत के हिसाब से काफी था। अब विष्णु की बहन की दोस्त ज़ीनाथ (जिसे ज़रीन दीदी कहती थी) ज़ीनाथ दीदी के अस्पताल में नौकरी करने की वजह से ज़ीनाथ को एक सलाह ये हो गई कि जब कभी अस्पताल में काम ज़्यादा होता और रात में लेट होती तो ज़ीनाथ विष्णु के फ्लैट में रात गुज़र लेती। स्टार्टिंग में विष्णु की ड्यूटी रात में होती या ज़ीनाथ दिन में ड्यूटी करती थी, इस लिए जब कभी भी ज़ीनाथ विष्णु के फ्लैट पर रुकती तो एक वक़्त में उन दोनों में से कोई एक ही फ्लैट पर होता था। फिर कुछ टाइम गुजरने के बाद विष्णु की ड्यूटी भी चेंज होकर सुबह की हो गई। विष्णु की ड्यूटी का टाइम चेंज होने से अब मसला ये हो गया कि जब ज़ीनाथ एक आधा दफा लेट होने की वजह से विष्णु के पास रुकती तो फ्लैट में एक ही बेड होने की वजह से विष्णु को कमरे के फर्श पर बिस्तर लगाकर सोना पड़ता। उन दिनों गंदगी की बुआई का सीजन चल रहा था, जिस वजह से परवेज दिन रात खेतों में बिजी रहता था, इस लिए पीछे दो हफ्तों से वो और ज़ीनाथ आपस में चुदाई नहीं पाते थे। लेकिन आज सुबह जब ज़ीनाथ गाड़ी में बैठकर हॉस्पिटल के लिए निकल रही थी, तो परवेज़ उसके पास आकर कहने लगा के काम खत्म हो गया है और अब मैं फ्री हूँ, फिर उसने आँख दबाकर ज़ीनाथ को इशारा किया।
“आज रात को” और खुदाई ही पड़ी। ज़ीनाथ ने परवेज़ की बात का क्या जवाब ना दिया और चुपचाप से गाड़ी चला दी। बेशक ज़ीनाथ परवेज़ के सामने कहमोश रही थी, मगर अस्पताल की तरफ गाड़ी डूबते हुए ज़ीनाथ ने बेखली में जब चूत पर खरीदारी की, तो उस टांगों के बीच चूत बहुत गीली महसुस हुई। ज़ीनाथ समझ गई के अंदर ही अंदर आज काफी टाइम बाद उसकी फुदी को खुद बा खुद लंड की तलब हो रही थी। उस रोज़ ना चाहते हुए भी बे इख्तियार ज़ीनाथ सारा दिन बार बार घड़ी को देखती रही कि कब दिन खत्म हो और कब वो घर जाए और पति का लंड मुस्लिम चूत में डलवाए। आज उसके दिल में एक अजीब सी एक्साइटमेंट थी, और उस दिन दोपहर के बाद दो बड़ी सर्जरी भी थी तो काम भी बहुत था। खैर दूसरी सर्जरी के दोरान ज़ीनाथ को उम्मीद से ज्यादा टाइम लग गया और वो बुरी तरह थक भी गई थी। 2 घंटे पहले और फिर वो होती है और उसका पति पूरी रात..रात को अचानक ज़ीनाथ की आँख खुली, उसका बदन कमरे में गर्मी की सीढि़यों से पसीना आ रहा था। ज़ीनाथ को एहसास हुआ कि उसकी कमीज उतारी हुई है और वो सिर्फ ब्रा या सलवार में बिस्तर पर लेती हुई है। गर्मी की सीढि़यों की वजह से कब और कैसे ज़ीनाथ ने कमीज उतार दी इसका उसे खुद भी पता न चला। ज़ीनाथ अभी भी नींद की खुमारी में थी और इस खुमारी में ज़ीनाथ ने महसूस किया उसके हाथ में उसके पति का लंड था। जिसे वो खूब सहला रही थी, और शॉर्ट्स में मजबूर उसके पति का लंड ज़ीनाथ के हाथों में झटके मार रहा था। इतने में ज़ीनाथ का दूसरा हाथ परवेज़ की पैठ से हल्का सा टच हुआ तो ज़ीनाथ को अंदाज़ा हुआ कि उसकी तरह उसके पति का कमीज भी उतरा हुआ है। ज़ीनाथ अपने पति के लंड को अपने काबू में करके मुस्कुराने लगी मगर सोते हुए भी उसने लंड को नहीं छोड़ा। कमरे में अँधेरा था, जिसकी वजह से कोई भी चीज़ नहीं देख रही थी, मगर ज़ीनाथ को कमरे में गुजती हुई पति की तेज़ तेज़ साँसों से पता चल रहा था कि वो भी जाग रहा है। ज़ीनाथ ने पति के लंड को नीचे से ऊपर तक हाथ फेरा तो उसके पति के मुँह से एक जोरदार सी “ssssssssi” सिसकारी निकल गई। सिसकारी की आवाज़ से लगता था आज ज़ीनाथ का पति कुछ ज्यादा ही गरम हो रहा था। ज़ीनाथ को भी हाथ में थामा हुआ पति का लंड आज कुछ ज्यादा ही लंबा, मोटा और सखात लग रहा था, खास कर लंड की मोटाई से तो आज ऐसा एहसास हो रहा था कि लंड जिसे फूल कर दब गया हो। ज़ीनाथ को पूरे दिन की सख्त मेहनत का अब फल मिल रहा था। वो आज पूरे दिन अस्पताल में बहुत ही व्यस्त रही थी।
या फिर शाम को दूसरी सर्जरी में कॉम्प्लीकेशन्स की वजह से ज़ीनाथ को हॉस्पिटल में काफी देर हो गई थी या ज़ीनाथ को ऐसा लग रहा था कि वो आज रात घर नहीं जा पाएगी इतनी रात को। अचानक ज़ीनाथ के दिमाग ने झटका खाया या वो नींद से पूरी तरह जाग गई। उफ्फ रात को तो मैं बहुत लेट हो गई थी या फिर मैंने घर फोन किया था कि मैं घर नहीं आऊंगी, फिर मैं विष्णु के फ्लैट पर, सोते-सोते ये सोच ही अचानक ज़ीनाथ के पूरे जिस्म में एक झुरझुरी सी दौड़ गई। “मैं अपने पति के साथ नहीं बाल्की मैं अपनी हिंदू सहेली के हिंदू बहाई !!! नहीं नहीं नहीं नहीं” सर्दी की ठंडी रात में भी ज़ीनाथ का बदन पसीने से तर-बतर हो गया। जब वो विष्णु के फ्लैट में आई थी तो विष्णु सोया हुआ था। फ्लैट की एक चाबी ज़ीनाथ पास भी थी, ज़ीनाथ ने दरवाजा खोला और कपड़े बदले बिना ही लेट गई या लेटते ही उसे नींद आ गई। फ्लैट में आते वक्त ज़ीनाथ इतना थकी हुई थी, जिसकी वजह से उसे डर था कि नींद के मारे वो कहीं रास्ते में ही ना गीर जाए। तो फिर क्या रात में विष्णु ने?
“नहीं, ऐसा नहीं हो सकता, विष्णु ऐसा नहीं है, तो फिर कैसे?” ज़ीनाथ सोच रही थी” कैसे मेरे हाथ में विष्णु का हिंदू लंड आ गया, अगर उसने कोई गलत हरकत नहीं की” ज़ीनाथ ने जब आँखें खोल कर गोर से देखा तो उसे अंदाज़ा हुआ कि रात को नींद की वजह से वो करवाते बदलते बदलते न जाने किस तरह विष्णु के बिस्तर पर चली आई है। हलकी दोनों बिस्तर पूरे जुड़े नहीं थे, लेकिन वो इतने करीब थे की नींद में करवाते बदलते हुए इंसान एक बिस्तर से दूसरे बिस्तर पर बड़ी आसानी से जा सकता था। “तो इसका मतलब मैं ही हूँ, विष्णु के बिस्तर पर, उसका हिंदू लंड हाथ में लेकर उफ़्फ़फ़्फ़ नहीं वो क्या सोचता होगा मेरे बारे में? ज़ीनाथ नींद के खुमार में अपनी आप ही बातें किए जा रही थी। ज़ीनाथ ने विष्णु की तरफ से कोई हलचल मचाई नहीं कि, लगता था शायद विष्णु को अंदाज़ा हो गया था ज़ीनाथ अब शायद जाग गई है और ये जो कुछ उनके डरमिया हुआ वो सब नींद में होने की वजह से हो गया था। दोनों के डरमिया मुश्किल से दो फिट का फासला होगा और वो दोनों चुप चाप लेते हुए थे। ज़ीनाथ की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे, वो ये सोच कर श्रम से पानी पानी हो रही के विष्णु उसके बारे में क्या सोचेगा। कमरे में बिल्कुल नहीं था, रे रे कर ज़ीनाथ अपने दिल ओ दिमाग में अपनी आपको कोस रही थी।”ये तूने क्या कर दिया? अब विष्णु क्या सोचता होगा? साली छिनाल ज़ीनाथ दीदी ऐसी है विष्णु के हिंदू लंड को? ज़ीनाथ अभी यहीं सोचो में गम थी के उसे एक और झटका लगा। ज़ीनाथ ने अभी अभी विष्णु का हिंदू लंड पकड़ा हुआ था, जब उसे नींद से जागे हुए कोई 15 मिनट हो गए थे। ज़ीनाथ ने सोचा के वो जल्दी से अपना हाथ विष्णु के हिंदू लंड से हटा ले मगर उस वक़्त सूरतेहाल ऐसी थी के वो चाटे हुए भी ऐसा भी ना कर सकी, ज़ीनाथ डर रही थी के अगर वो कोई हरकत करती है तो विष्णु कुछ बोल ना पड़े। “क्या करूँ” ज़ीनाथ यह सोच रही थी मगर उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, ऐसे ही पढ़े-लिखे कोई एक आधा मिनट गुजर गया और ज़ीनाथ का हाथ अभी तक विष्णु के हिंदू लंड पर था। विष्णु का हिंदू लंड अब कुछ ढीला हो गया था मगर फिर भी ज़ीनाथ को विष्णु विष्णु के हिंदू लंड के साइज़ में काफी बड़ा एहसास हो रहा था। आधी रात को अंधेर कमरे में बेड पर साथ साथ सीधे लेते दोनों विष्णु जगह तो रहे थे, मगर उन दोनों में कोई नहीं जानता था कि वो अब करे तो क्या करे। “परवेज़ के लंड के मुकाबले में विष्णु का हिंदू लंड काफी लंबा और मोटा है” उफ़्फ़ मैं भी क्या सोच रही हूँ विष्णु के हिंदू लंड के बारे में, ज़ीनाथ ने अपना आपको कोसा. मगर सच में है तो बहुत बड़ा, उफ़्फ़ पूरा खड़ा होकर तो!!! मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए ज़ीनाथ ने अपना आपको फिर दांत “विष्णु तो तसल्ली कर देता होगा सच में,,Muslim sex story
हाय कितना लंबा है मोटा तो बाप रे,, किसी कुंवारी लड़की की तो” सोचते-सोचते कब 35 साल की जवान खूबसूरत ज़ीनाथ ने अपना हाथ विष्णु के हिंदू लंड के घेर कस दिया, उसे पता ही नहीं चला। ज़ीनाथ के हाथ ने जिसे ही विष्णु के हिंदू लंड को कसा तो विष्णु के मुंह से सिसकारी फूट पड़ी, और उसके सोते हुए हिंदू लंड ने फिर झटका खाया और फिर से एक दाम खड़ा होने लगा। विष्णु की सिसकारी सुन कर ज़ीनाथ एक दाम हदबड़ा कर ख्यालों की दुनिया से बाहर निकल आई और उसने फोरन विष्णु के हिंदू लंड को अपने हाथ से छोड़ दिया। मगर जब एक जवान कुंवारा हिंदू लड़का हो और साथ में एक खूबसूरत जवान शादीशुदा मुस्लिम सेक्सी औरत जो उसकी बहन की सहेली हो, और वो भी मुस्लिम सेक्सी औरत जब रात को एक ही बिस्तर पर आधी नंगी लेती हुई उस जवान हिंदू लड़के के हिंदू लंड को सहला रही हो, तो एक हिंदू सहेली का हिंदू बहन होने के बावजूद विष्णु अपनी आपको कैसे काबू में रखता है। इसके लिए जब विष्णु ने अपने हिंदू लंड को ज़ीनाथ दीदी के हाथ से निकलता हुआ महसूस किया तो उसने फोरन ही ज़ीनाथ की तरफ करवा बदली। विष्णु ने ज़ीनाथ को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और फिर ज़ीनाथ दीदी के हाथ को पकड़कर उसे दोबारा अपने हिंदू लंड पर रख दिया। साथ ही विष्णु का बायां हाथ सरकता हुआ ज़ीनाथ की टांगों के डरमिया आया और उसने अपना हाथ पहली बार ज़ीनाथ दीदी की शादी शुदा मुस्लिम मोटी चूत पर रख दिया। विष्णु का हाथ मुस्लिम चूत पर लगते ही ज़ीनाथ का बिगड़ा अकड सा गया, ज़ीनाथ ने विष्णु को रोकने के लिए थोड़ा मजामत करते हुए विष्णु के हाथ को मुस्लिम चूत से हटने की कोशिश की, मगर वो उसे न रोक पाई और विष्णु का हाथ बेताबी से ज़ीनाथ दीदी की फुली हुई मुस्लिम चूत पर फिसल रहा है।
ज़ीनाथ पिछले दो हफ़्तों से पति परवेज़ से नहीं चुदी थी इस लिए आज ज़ीनाथ के बदन में आग लगी हुई थी, और उसकी मुस्लिम चूत से पानी बहने लगा था। ज़ीनाथ की मुस्लिम चूत लंड मांग रही थी विष्णु का हिंदू लंड ज़ीनाथ के हाथ में था। उसके हिंदू सहेली के छोटे हिंदू बहाई का लंबा मोटा हिंदू लंड। जवानी की गर्मी और सेक्स की हवास ने उन दोनों की सोचने और समझने की सलाह जिससे खत्म कर दी थी और शर्म का पर्दा गिरना शुरू हो गया था। विष्णु के हाथ उसकी ज़ीनत दीदी की पानी छोड़ती हुई मुस्लिम चूत से खेलने में मसरूफ रहा, जिनके असर से ज़ीनत का बदन अब ढीला पड़ने लगा। जब विष्णु ने महसूस किया कि रुबीना दीदी थोड़ी ढीली पड़ गई है तो उसका हौसला भी बढ़ गया, और उसका हाथ ज़ीनत दीदी की मुस्लिम चूत को छोड़ कर उसके मम्मों पर आ गया और ब्रा के ऊपर से ज़ीनत दीदी के तने हुई माँ पर हाथ फेरने लगा। उधर विष्णु के बहकते हाथों ने ज़ीनाथ की मुस्लिम चूत में भी हाल चल मचा दी थी, इस लिए उसको भी अब अपने आप पर कंट्रोल न रहा और फिर ज़ीनाथ का हाथ भी खुद बा खुद तेज तेज उसके विष्णु के हिंदू लंड पर दोबारा चलने लगा, ऊपर से नीचे तक ज़ीनाथ विष्णु के हिंदू लंड को मुट्ठी में भर कर निचोड़ रही थी विष्णु के हिंदू लंड की चमड़ी को सामने की ओर खिंच रही थी..लंड के प्रीकम से भीगी हुई विष्णु के हिंदू लंड की चमड़ी से खेलने में ज़ीनाथ को मजा आ रहा था विष्णु बे आहेन भर रहा था आआआआह्ह्ह। अब विष्णु ने अपने हाथ से ज़ीनाथ की मम्मो को मसलना शुरू कर दिया, जितना जोर से वो ज़ीनाथ की मम्मो को मसलता उतने ही जोर से उसकी ज़ीनाथ दीदी ज़ीनाथ उसके हिंदू लंड को पकड़ कर खींचती और दबाती। ऐसा लग रहा था जिसे अँधेरे कमरे में दोनों ज़ीनाथ दीदी विष्णु आपस में कोई मुकाबला कर रहे हों, पूरे कमरे में दोनों की तरफ, केहरा और सिसकियाँ गूंज रही थीं। विष्णु ने ज़ीनाथ को थोड़ा सा उठाया और उसने अपने हाथ ज़ीनाथ की कमर पर ले जाकर ज़ीनाथ दीदी के ब्रा के हुक खोल दिए। ज़ीनाथ दीदी के ब्रा की हुक खोलते ही एक बेसब्र बच्चे की तरह विष्णु ने ब्रा को खींच कर निकाला और ज़ीनाथ दीदी के बदन से दूर फेंक दिया,
अब ज़ीनाथ विष्णु के सामने कमरे से ऊपर पूरी नंगी थी। हलाकी कमरे में बहुत अंधेरा था लेकिन ज़ीनाथ विष्णु की नज़र अपने जिस्म पर गुस्सा कर रही थी। विष्णु ने अपना मुँह नीचे झुकाया और ज़ीनाथ दीदी के दाहिने मम्मे को जीभ से चाटने लगा। विष्णु के मुँह अपनी मम्मे पर लगते ही ज़ीनाथ तो जैसे शहर सी उठी, उसने विष्णु का सिर पकड़कर अपने मम्मे पर दबाया तो विष्णु ने मुँह खोला और ज़ीनाथ दीदी के तने हुए निप्पल को मुँह में ले कर चूसने लग गया। विष्णु,, आआआआह ह्ह्ह्ह्ह विष्णु हिंदू हरामज़ादे मादरचोद यह क्या कर रहा है,, हाआआआआआ aaaaaaaa aaaaaayee” ज़िनाथ फरहत ए जज़्बात में गंदी जुबान में बोल उठी. विष्णु ने भी गंदी जुबान शेरो करती… रंडी साली छिनाल… मुझको हिंदू हरामजादा बोलती है मुस्लिम रांड आज..तुझको दिखाऊंगा हिंदू हरामजादा कैसे तेरी इस मुस्लिम चूत को अपने हिंदू लंड से चोदेगा…मुस्लिम रंडी…ये कहते हुए विष्णु निप्पल को काटते हुए चूस रहा है, बीच बीच में उसे बदल कर दूसरे मम्मे को चूसने लग जाता है, विष्णु एक मम्मा चूसता तो दूसरा मसलता, ज़िनथ विष्णु का वलिहना पन को महसूस करके मज़े के मारे पागल हो रही थी..आआआआआआआआआआआह ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह हिंदू हरामी आआआआआआह्ह hhhhhhh15 मिनट मम्मे चूस लिए गए थे और ज़ीनाथ अब बेसुध होती जा रही थी, तभी ज़ीनाथ ने विष्णु के हाथ सलवार के नाड़े पर गुस्सा किया, विष्णु ने ज़ीनाथ का मम्मा मुँह से निकाला और फिर ज़ीनाथ दीदी की सलवार का नाड़ा पकड़कर एक ही झटके में खोल दिया। चुदाई की हवस में डूबी हुई ज़ीनाथ ने भी बिना सोचे समझे कमर उठा कर अपनी पूरी नंगा करने में विष्णु की मदद की। अगले ही पल ज़ीनाथ विष्णु की उंगली में दीदी के इलास्टिक में गुस्सा की और फिर दूसरे झटके में ज़ीनाथ की दीदी भी उसके बदन से अलग हो गई। अब ज़ीनाथ पूरी तरह से नंगी थी, आज से पहले वो ये कभी सोच भी नहीं सकती थी कि उसकी हिंदू सहेली का हिंदू भाई विष्णु उसे कभी इस तरह न सिर्फ नंगी करेगा। बच्ची वो खुद उसके हाथो नंगी होने में उसकी मदद करेगी। लेकिन वो सब कुछ जो सोचा नहीं था हो रहा था और तेजी से हो रहा था। ज़ीनाथ दीदी को मखमल नंगी करने के बाद विष्णु ने भी अपना शॉर्ट्स उतार कर नीचे फेंक दिया, ज़ीनाथ बिस्तर पर तांगे फेंके पड़ी थी। खुद को नंगा करते ही थोड़ा सा भी टाइम बर्बाद किए बगेर विष्णु फोरन ज़ीनाथ दीदी की खुली तांगों के बीच आया और अपना हिंदू लंड ज़ीनाथ दीदी की मुस्लिम चूत के मुंह पर टिक्का दिया। विष्णु के मोटे ताजे और जवान हिंदू लंड का गरम प्यासी मुस्लिम चूत के साथ टकराव महसूस करते ही ज़ीनाथ की मुस्लिम चूत जो पहले ही बुरी तरह से गीली थी, वो कांप गई।
ज़ीनाथ ने विष्णु की कमर के पीछे से कमर लपेट दी, ज़ीनाथ से अब इंतज़ार नहीं हो रहा था, वो चाहती थी कि अब उसका विष्णु अपना हिंदू लंड उसकी मुस्लिम चूत के अंदर डाल कर उसे बस छोड़ ही डाले। विष्णु अपना हिंदू लंड ज़ीनाथ दीदी की मुस्लिम चूत में डालने की बजाए मुस्लिम चूत के होंठों के ऊपर ही अपना हिंदू लंड रगड़ने लगा, शायद वो ज़ीनाथ दीदी की मुस्लिम चूत की प्यास और बढ़ाने के लिए जान बुझा कर ऐसा कर रहा था। ज़ीनाथ के लिए वाकयी ही ये बात अब नाकामयाब बर्दाश होने लगी थी और वो हवास के तूफान में अंधी होकर विष्णु पर बरस पड़ी। “यह क्या कर रहा है, हिंदू हरामी..मादरचोद…अपना हिंदू लंड अंदर डाल,, अंदर डाल जल्दी इससे,, हाय अब बर्दाश्त नहीं होता जल्दी छोड़ दे हिंदू कमीने… ज़ीनाथ होशो हवास गवा चुकी थी, और अब बिस्तर पर विष्णु के सामने एक ज़ीनाथ दीदी नहीं बलके एक प्यासी मुस्लिम सेक्सी औरत पड़ी थी, जिसके बदन की आग आज बहुत ऊंचाई पर पहन चुकी थी, और यह आग अब उस वक्त सिर्फ विष्णु के हिंदू लंड से ही बुझ सकती थी। “आआआआआआआआआआआआआआआआआह क्या सोंच रहा हिंदू भदवे हिंदू “हरामी मैं तेरी बहन कविता नहीं हूँ क्या सोच रहा है हिंदू साले हरामी,, इस हिंदू लंड को जल्दी से अंदर डाल, वरना काट कर खा जाऊँगी” ज़ीनाथ लग भाग चिल्ला उठी थी। ज़ीनाथ दीदी के चिल्लाने पर विष्णु जी से नींद से जगह उठा,
उसने जल्दी से हिंदू लंड ज़ीनाथ दीदी की मुस्लिम चूत के मुँह पर टीका लगाया और ज़ीनाथ की पतली कमर को अपने हाथों से मज़बूती से थम लिया। ज़ीनाथ ने मदहोशी में आँखें बंद कर लीं, और उस लम्हे के लिए खून को तैयार कर लिया जिसका उसे अब बेसबरी से इंतज़ार था। विष्णु ने दबाव बढ़ाया और उसका मोटा हिंदू लंड उसकी ज़ीनाथ दीदी मुस्लिम चूत के होंठों को चीरता हुआ मुस्लिम चूत के अंदर जाने लगा। ज़ीनाथ अपने पति से खूब चूड़ी थी मगर विष्णु के मोटे हिंदू लंड का एहसास ही कुछ और था। शादी शुदा होने के बावजुद ज़ीनाथ की मुस्लिम चूत काफी टाइट थी और विष्णु के हिंदू लंड की मोटाई ज्यादा होने की वजह से विष्णु को अपना हिंदू लंड ज़ीनाथ की मुस्लिम चूत में डालते वक्त खूब जोर लगाना पड़ रहा था। ज़ीनाथ को विष्णु के मोटे हिंदू लंड को मुस्लिम चूत के अंदर लेते वक़्त हल्की हल्की तकलीफ़ तो हो रही थी आह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…हायेईईईई मर्दला हिंदू मादरचोद, ज़ीनाथ जोश में होने की वजह से उसे अब किसी भी तकलीफ़ की शिकायत नहीं थी, बाल्की उसे तो इस तकलीफ़ में भी एक मज़ा आ रहा था। ज़ीनाथ ने विष्णु के कंधे थम लिए और कमर पूरी जोर से ऊपर उठाते हुए विष्णु की मदद करने लगी। हिंदू लंड की टोपी अंदर घुसा कर विष्णु रुका और फिर उसने ज़ीनाथ की कमर पर अपने हाथ कस लिए और एक करारा झटका मारा। हाय विष्णु हिंदू हरामी साले मार दित्ता तू ने मुझे उफ्फ्फ बहुत मोटा है तेरा” ज़ीनत ने फिर मज़े से कहरातर हुए कहा। उसका आधा हिंदू लंड उसकी बहन की सहेली की मुस्लिम चूत में समा चुका था।
विष्णु ने हिंदू लंड बाहर निकाला और फिर एक जोरदार झटका मारा और इस बार हिंदू लंड और अंदर तक चला गया। इसी तरह वो पूरा हिंदू लंड एक दाम से अंदर डाल कर आहिस्ता आहिस्ता ज़ीनाथ दीदी को छोड़ने लगा, कुछ ही मिनट में विष्णु का हिंदू लंड ज़ीनाथ की मुस्लिम चूत की जड़ तक पहुँच चुका था। ज़ीनाथ ने टंगे विष्णु की कमर पर लपेट दी, ज़ीनाथ के मुँह से फूटने वाली हल्की सिसकियाँ उसके विष्णु का हौसला बढ़ा रही थी और वो हर धक्के पर पूरी ताकत लगा रहा था। विष्णु ज़ीनाथ के होंट चूसते हुए अपना थक ज़ीनाथ के मुँह में डाल रहा था.. ज़ीनाथ विष्णु का थक निगल रही थी…और ज़ीनाथ मजे की इस हालात में पोहांच चुकी थी, कि इस हालात को लफ्जों में बयान करना उसके लिए ना मुमकिन था। ज़ीनाथ विष्णु की गार्डन गाल सब चट रही थी…विष्णु ढकों पर धक्के मर रहा था.. आराम से विष्णु,, इतना भी जोर मत लगा के मेरी कमर टूट जाए,, तेरे पास ही हूँ जितना चाहे तू मुझे रगड़ रगड़ कर छोड़ ले.. क्या करूँ मुस्लिम रांड साली छिनाल उफ्फ़फ्फ़ तेरी मुस्लिम चूत इतनी टाइट है कि कंट्रोल नहीं होता ऐसा मज़ा ज़िंदगी में पहले कभी नहीं आया विष्णु ज़ीनाथ के बगल चट रहा था ज़ीनाथ के बगल के छोटे छोटे बालों पर विष्णु का थक जम रहा था…ज़ीनाथ को ऐसा मज़ा कभी नहीं मिला था…उस से 10 साल छोटा जवान हिंदू लड़का उसकी मुस्लिम चूत को भोग रहा था.. विष्णु ज़ीनाथ को छोड़ते हुए उसके बगल चाटे हुए बोला रंडी मुस्लिम साली क्या टाइट मुस्लिम चूत है तेरी..तेरी मुस्लिम चूत छोड़ने में बहुत मज़ा आता है। नहीं रे तेरा ही इतना मोटा है के,, देख तो कैसे फंसा हुआ है,, उफ़फ्फ़ कैसे रगड़ रहा है मेरी फुदी … ज़ीनाथ के मुँह से मुस्लिम चूत लफाज निकलते निकलते रह गया। ज़ीनाथ ने कभी भी पति के साथ सेक्स करते हुए ऐसी जुबान का इस्तेमाल नहीं किया था, मगर आज विष्णु के साथ इतनी गरम जोशी से सेक्स करते वक़्त ज़ीनाथ शर्म ओ हेया की सब हद पार कर जाना चाहती थी।मुस्लिम चूत और हिंदू लंड की जंग जारी थी, मुस्लिम चूत में लगा तार पड़ रहे जोरदार घासों से जाहिर हो रहा था, कि विष्णु को ज़ीनाथ दीदी की मुस्लिम चूत चोदने में कितना मजा आ रहा था।
विष्णु के हर धक्के में हिंदू लंड ज़िनथ की मुस्लिम चूत की जड़ तक उतार देता, उसका हिंदू लंड ज़िनथ की बच्चे दानी पर ठोकर मार रहा था, हर धक्के के साथ उसके किनारे ज़िनथ की मुस्लिम चूत के नीचे जोर से टकराते। ज़िनथ भी विष्णु की ताल से ताल मिलते हुए कमर उछलती हुई मुस्लिम चूत विष्णु के हिंदू लंड की और लेने लगी। ज़ीनाथ ने विष्णु के कंधे मज़बूती से थम लिए और तांगे उसके चुट्टनों के गिर्द कस दी और विष्णु के हर धक्के के जवाब भी उतने ही जोश से देने लगी जितने जोश से वो ज़ीनाथ दीदी को छोड़ रहा था, हर धक्के के साथ ज़ीनाथ के मुख से सिसकारियाँ फूट रही थी। ज़ीनाथ ज़बरदस्ती विष्णु के गाल गार्डन अपनी ज़बान से चैट कर रही थी..अपने हाथों से विष्णु के छोट्टनों को मसल रही थी..दोनों के जिस्मों के टकराने और हिंदू लंड की गीली मुस्लिम चूत में हो रही आवाज़ों ही से पूरे कमरे में आवाज़ें गूंज रही थी। हिंदू मादरचोद औरोर जोर लगा विष्णु हिंदू भदवे! और जोर से! हाय ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया मेरे हिंदू राजा विष्णु! और जोर लगा कर डाल मेरी मुस्लिम चूत में विष्णु* ज़ीनाथ के मुंह से निकलने वाले लफाज ने आग में घी का काम किया। विष्णु एक बे काबू सांड की तरह ज़ीनाथ दीदी ज़ीनाथ को छोड़ने लगा, साफ जाहिर था कि उसे ज़ीनाथ दीदी के मुंह से निकले उन गरम लफाजों को सुन कर कितना मजा आया था। और उसके जोश में इतना इज्जाफा हो गया था, जिसकी वजह से उसका हर घास उसकी बहन की सहेली की मुस्लिम चूत को फाड़ कर रख देने वाला था। शाबाश हिंदू हरामज़ादे विष्णु,, छोड़ मुझे,, और ज़ोर से धक्के मार,, पूरा अंदर तक डाल अपना हिंदू लंड मेरी मुस्लिम चूत में आज ज़ीनत ने सब रिश्ते नाते बुलाकर दुनियाओं की सब हद पार कर ली और इसका इनाम भी उसे खूब मिला। विष्णु ज़ीनाथ के होंट चूसते हुए अपना थके उसके मुँह में डालते हुए जिससे ज़ीनाथ मज़े से निगल रही थी.. ट्रेन की रफ़्तार से ज़ीनाथ दीदी की मुस्लिम चूत चोदने लगा ये ले मुस्लिम रंडी साली और ले….आज तेरी मुस्लिम चूत ही नहीं इसके बाद तेरी ये बड़ी मोटी गांड भी मारूंगा मुस्लिम छिनाल क्या मस्त मोटी गांड है तेरी मुस्लिम रंडी…अभी तो तेरी मुस्लिम चूत की आग ठंडी करने के लिए तुझे चोदना शुरू किया है मुस्लिम रंडी…अभी तेरी मुस्लिम चूत नहीं चाटी…अपना हिंदू लंड तुझसे नहीं चुसवाया…मुस्लिम रंडी ये ले मेरा हिंदू हरामज़ादा लंड ज़ीनाथ रंडी दीदी…आज रात तेरा मुँह छोड़ना है…तेरी मोती गोल गोल गांड भी मरनी है मुझे तुझे चोद चोद कर छिनाल बनाना है मुस्लिम रंडी…आज से तू मेरी मुस्लिम रखेल है…समझी मेरी मुस्लिम रंडी… ज़ीनाथ के जिस्म में जिसे करंट दौड़ रहा था विष्णु की बातें और चुदाई से मुस्लिम चूत के अंदर पड़ रहे थे जवान हिंदू लड़के के हिंदू लंड के धक्कों से मजे की लहर उठकर पूरे बदन में फील कर रही थी, जिस वजह से ज़ीनाथ अपना बदन अकड़ने लगी, ज़ीनाथ अब जल्दी ही छूटने वाली थी.हाआआआआई,, मार डाल मुझे हिंदू मादरचोद,, उफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ अपनी मुस्लिम ज़ीनाथ दीदी को छोड़ रहा है हिंदू सल्ले कमीने,, किस जन्म का बदला ले रहा है..हिंदू सल्ले हरामी कुत्ते* बदला नहीं मेरी मुस्लिम छिनाल,, मैं तो तुझे,, दिखा रहा हूँ असली चुदाई कैसे होती है, कैसे एक हिंदू लड़का मुस्लिम सेक्सी औरत की तसल्ली कराता है है,, देखना कहीं तसल्ली करते करते मेरी मुस्लिम चूत न फाड़ देना आह्ह्ह्ह मेरा मर्द परवेज़ हिंदू रंडियों को छोड़ता है आज से थू इस मुस्लिम रंडी को चोद…चोद डाल डाल डाल मेरी मुस्लिम चूत को आआआआआआआआआह्ह्ह्ह ज़ीनाथ ने बाहर विष्णु की गर्दन पर लपेट दी और तांगे विष्णु की कमर पर और भी जोर से कस दी। ज़ीनाथ की कमर अब हिलनी बंद हो चुकी थी, दोनों विष्णु ज़ीनाथ दीदी बुरी तरह से हाथ रहे थे। ज़ीनाथ को टाइट मुस्लिम चूत में विष्णु का हिंदू लंड फूला हुआ महसूस हुआ, लगता था वो भी झड़ने के करीब ही था। *विष्णु हिंदू हरामी मादरचोद मैं छूने वाली हूँ, मेरे साथ साथ तू भी छूट जा मेरे हिंदू राजाआआआआ आआआआ आआ… आआआआआआहये हाय उफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़…आआआ आआआ आआआह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह और ज़ीनाथ की मुस्लिम चूत झड़ने लगी, मुस्लिम चूत से गरम रस निकाल कर विष्णु के हिंदू लंड को भीगने लगा,
ज़िनाथ की मुस्लिम चूत बुरी तरह से खुलती और बंद होते हुए विष्णु के हिंदू लंड को कस रही थी। विष्णु ने पूरा हिंदू लंड बाहर निकाल कर पूरे जोर से अंदर पेला, आआआआआआआआआ ज़ीनाथ मुस्लिम रंडी मैं झड़ रहा हूँ आआआआआआआआआ आआआआआआ आह्ह्ह्ह्ह्ह..ज़ीनाथ छिनाल मेरी मुस्लिम रंडी मेरे हिंदू वर्जिन को तेरी मुस्लिम चूत में डाल कर थूजको माँ बनाऊंगा मेरी मुस्लिम रखैल आआआआआआआआआ आआआआआआ आआआआआआआह्ह्ह्ह ऐसे दो तीन जोरदार धक्के मारने के बाद एक हुंकार भरते हुए ज़ीनाथ के ऊपर पड़े विष्णु के हिंदू लंड से गांडी मलाई निकाल कर ज़ीनाथ दीदी की मुस्लिम चूत को भरने लगी, उन दोनों की हालत बहुत बुरी थी. ज़ीनाथ को एक अनजानी खुशी का एहसास अपने पूरे जिस्म में एहसास हो रहा था, उसे लग रहा था जिससे उसका जिस्म एक दम हल्का होकर आसमान में उड़ रहा हो, वो पल कितने मज़ेदार थे, ऐसा सुख, ऐसा करार उसने ज़िंदगी में पहली बार एहसास किया था. आहिस्ता आहिस्ता ज़ीनाथ की मुस्लिम चूत ने फड़फड़ाना बंद कर दिया। उधर विष्णु का हिंदू लंड भी अब पूर सकुन हो चुका था और आहिस्ता आहिस्ता उसका हिंदू लंड भी नरम होता जा रहा था। विष्णु अभी तक ज़ीनाथ दीदी के ऊपर ही गीरा पड़ा था, और उसके जिस्म के बोझ तले ज़ीनाथ के लिए अब हिलना भी मुश्किल था। थोड़ी देर बाद विष्णु ज़ीनाथ के ऊपर से उतरकर उसके काबू में ले लिया गया।Antarvasna Stories